सुनीता ध्यानी (रा.प्रा.वि नौणियाखेत - नैनीडांडा )
भाग मनखि भाग। प्रकृति कुपित है या मनुष्य भ्रमित समझ नहीं आता.... सभ्यता विकास की होड़ में मनुष्य कुछ गलतियां कर बैठा है.. प्रकृति के खेलने-खुलने-पनपन…
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सुनीता ध्यानी (रा.प्रा.वि नौणियाखेत - नैनीडांडा )
बेटी पर कविता लिखते हुए मैं यह कहना चाहूंगी कि बड़ी बिडम्बना है कि घर से लेकर और बाहर समाज में कहीं भी जब बेटियों पर बात होती है तो हर कोई उनके लिए…
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सुनीता ध्यानी (रा.प्रा.वि नौणियाखेत - नैनीडांडा )
समय परिवर्तन पर हिंदी कविता बदलाव में आप पढ़ रहे हैं कि जीवन का आरम्भ एक अद्भुत घटना होती है, जिसे अनुभूत करने की स्थिति में कोई भी प्राणी स्वयं सक…
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सुनीता ध्यानी (रा.प्रा.वि नौणियाखेत - नैनीडांडा )
एक समुदाय / क्षेत्र जहाँ पर निरन्तर आवश्यकता के अनुरूप भौतिक विकास न हो पलायन का मुख्य कारण बन जाता है। कवयित्री सुनीता ध्यानी जी ने अपनी पलायन पर…
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सुनीता ध्यानी (रा.प्रा.वि नौणियाखेत - नैनीडांडा )
नारी की भावना पर हिन्दी कविता "मुझे समझ लो ना " पुरुष समाज के प्रति नारी मन की भावना को प्रदर्शित करती है। एक नारी के प्रति पुरुष का प्र…
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